Process of Selecting Bride (Boy) - Bride (Girl) in Kurukh Tribal Society // कुँड़ुख़ आदिवासी समाज में बर (लड़का) – बधु (लड़की) चुनने का प्रक्रिया

कुँड़ुख़ आदिवासी समाज में बर (लड़का) – बधु (लड़की) चुनने का प्रक्रिया

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आइए, प्रिय पाठकों,

नमस्कार दोस्तों, मैं रोशन टोप्पो,आपका स्वागत करता हूँ और आपको लेखनी के माध्यम से एक रोचक और अनूठे पहलू पर लेकर ले आया हूँ। आज का हमारा विषय है "कुँड़ुख़ आदिवासी समाज में बर (लड़का) – बधु (लड़की) चुनने का प्रक्रिया"। भारतीय समाज में विवाह को एक महत्वपूर्ण सामाजिक घटना माना जाता है, और यह लगभग हर क्षेत्र और समुदाय में विभिन्न रूपों में प्रतिष्ठित है। हम इस लेख में विशेषकर कुँड़ुख़ आदिवासी समाज के बारे में चर्चा करेंगे, और उनके बर-बधु चयन के पीछे छिपे रहस्यों और प्रक्रियाओं को समझेंगे। इसमें हम देखेंगे कि कैसे यह समाज अपने विवाह संस्कृति को महत्वपूर्ण बनाए रखता है और बर-बधु का चयन करने में कैसे सामाजिक, आर्थिक, और आध्यात्मिक प्रासंगिकताओं का ध्यान रखता है। इस यात्रा में हम साझा करेंगे कुँड़ुख़ आदिवासी समाज के विवाह संस्कृति के विचार, जिसमें पुरानी परंपराओं का मिलन होता है और नए जीवन की शुरुआत के लिए एक साथी का चयन करने की खोज होती है। आप सभी से एक साझा और जिज्ञासापूर्ण यात्रा की आशा करता हूँ। धन्यवाद।

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कूँडूख समाज में बर बधु चयन प्रक्रिया

बेटे-बेटियों को शादी करना माँ-बाप का परम पवित्र कर्त्तव्य है । ये अपने-अपने बाल-बच्चों की शादी कर देना अपने पाप का उद्धार मानते हैं । साथ ही साथ अपने वंशज को इस ईश्वरीय जगत में कायम रखना फर्ज समझते हैं । कुँड़ुख़ आदिवासी समाज में एक ही गोत्र में शादी नहीं होती है। इसे वे खून का संबंध मानते हैं। कुँवारे लड़के की शादी कुँवारी लड़की से होती है शादी-शुदा लड़का कुँवारी लड़की से शादी कर सकता है किन्तु शादी हुई लड़की को कुँवारे लड़के से शादी का प्रावधान नहीं है । अगर लाचारी है तो लड़के की शादी लोटे या ढेला से करके उनके कुंवारेपन को तोड़कर ही विवाहिता से शादी कर दी जाती है । उराँव समाज के लोगों का विश्वास है कि मरने के बाद इन युगल जोड़ियों को साथ रहना है । शादी एक ऐसा बंधन या संस्कार है जिसका संबंध इस दुनिया में और मरने के बाद परलोक तक है ।

एक औरत दो पतियों के साथ रह नहीं सकती है । आखिर मरने के बाद वह किसके साथ रहेगी । भले मर्द अपने साथ दो या अधिक पत्नियों को रख सकता है । अगर किसी औरत का पति मर जाता है तो, वह विधवा औरत किसी विवाहित व्यक्ति या विधुर के साथ अपने बाकी जीवन का गुजर-बसर करने के लिए दूसरी शादी कर सकती है , जिसे कुँड़ुख़ में 'सगाई' करना कहते हैं। इस प्रकार उनको इस दुनिया में जीने का आधार बन जाता है ।

उराँव कुँड़ुख़ समाज में लड़के की ओर से अगुए के द्वारा लड़की की खोज होती है । शादी- बिबाह समाज का एक सामाजिक दायित्व है । गाँव के युवक-युवतियाँ और बूढ़े - बुढ़िया शादी में सहयोग करते हैं जिससे शादी घर का बोझ हल्का होता है । हरेक काम या रीति-रिवाज में हाथ बढ़ाते हैं, आर्थिक मदद भी करते हैं।

कुँड़ुख़ डंडी

तेताली मूली नू खारा सुन्दर पेल्लो रई हो,

कला मेनर बरा, चिओर होले पाही ननोत,

मला होले दोशरा बेद्दोत ।

तेताली मूली नू खारा सुन्दर पेल्लो रई हो,

कला मेनर बरा, चिओर होले पाही ननोत,

मला होले दोशरा बेद्दोत ।

अर्थ

लड़के की माँ अगुए को ईशारा करते हुए कहती है, ‘’उस गाँव में इमली पेड़ के नीचे वाले घर में एक खूबसूरत लड़की है,वह पसन्द लायक है। अगुवा भाई आप जा कर उस घर के माँ-बाप से शादी के संबंध में बात चीत कीजिये | अगर वे शादी के लिए तैयार हो जायेंगे तो मेहमानी के लिए आगे की बात बढ़ायी जायेगी नहीं तो दूसरी लड़की की खोज होगी । ‘’

अगर शादी की बात पक्की हो जाती है और किसी कारणवश शादी सम्पन्न हो नहीं पाती है तो करमा त्योहार के समय लड़की के घर में करम डौड़ा भेजने का प्रावधान है। करम डौड़ा में कपड़ा - लता, चूड़ी, फीता - खोंगसो दतुवन आईना, कन्घी और अन्य जरूरी सामानों को एक नये डौड़े में सजाकर भेज देते हैं। होने वाली बहू इन्हीं सामानों से सज-धज कर करमा का त्योहार आनन्दपूर्वक मनाती है।

लड़के की माँ अगुए को ईशारा करते हुए कहती है, ‘’उस गाँव में इमली पेड़ के नीचे वाले घर में एक खूबसूरत लड़की है,वह पसन्द लायक है। अगुवा भाई आप जा कर उस घर के माँ-बाप से शादी के संबंध में बात चीत कीजिये | अगर वे शादी के लिए तैयार हो जायेंगे तो मेहमानी के लिए आगे की बात बढ़ायी जायेगी नहीं तो दूसरी लड़की की खोज होगी । ‘’

अगर शादी की बात पक्की हो जाती है और किसी कारणवश शादी सम्पन्न हो नहीं पाती है तो करमा त्योहार के समय लड़की के घर में करम डौड़ा भेजने का प्रावधान है। करम डौड़ा में कपड़ा - लता, चूड़ी, फीता - खोंगसो दतुवन आईना, कन्घी और अन्य जरूरी सामानों को एक नये डौड़े में सजाकर भेज देते हैं। होने वाली बहू इन्हीं सामानों से सज-धज कर करमा का त्योहार आनन्दपूर्वक मनाती है।


अगले भाग में हम जानेंगे "कुँड़ुख़ आदिवासी समाज में लड़की याने बहू खोजने के चार तरीके हैं चलिए अभी जानेंगे वह क्या क्या है ?"

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